याद आ गये तुम दोस्त
मूक मेरे अभिप्रायो को
बधिर इन उपायो को
मेरे इस अंतर के सच को
याद आ गये!
आ क्या गये, बस मिटा ही गये
इस नाखुशी को, जो अब तक खुशी मानी
हर उस कमी को , जो हमने पूरी जानी
आईना तोड़ दिया मिथ्या का
की बस
रुला ही गये तुम दोस्त
याद आ गये!
गर तुम दूर जाते, तो वापस भी लता
अगर रूठ जाते , तुम्हे मैं मानता
है शिकवा बस इतना ही तुमसे
की बस भुला ही गये तुम दोस्त
याद आ गये!
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