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इक कोशिश , आशा है
जी लेंगे जीभर के हम
नही महज यह गीत जो हम गुनगुना रहे
मिल गये हैं संग वो जो वो दिल हैं गा रहे
ये साथ ना छोड़ेंगे हम
आए भले कितने सितम
सपनो में देखा है जैसा
हो अपना जहाँ एक वैसा
जी लें जीभर इस जीवन को
सोचा है हमने ऐसा
थामे रहें ये हाथ हम
आए भले कितने सितम
दिन शायद ऐसे भी आयें
खुद को टूटा हुआ पाए
याद करेंगे शायद जो यह पल
आँखे नाम हो जाए
याद रहे अपनी कसम
थे साथ हैं, रहेंगे हम