कल बहुत अच्छे लग रहे थे तुम
केमिस्ट्री ट्यूशन की क्लास में
वो हल्की नीली सलवार सूट
काफ़ी फॅब रही थी तुमपे
लग रहा था पूरी क्लास में जैसे
एक नीलम उजाला छाया हो
मैं भी उसी क्लास में आता हूँ
तुम्हे पता नही चलता होगा
तुम्हारी और मेरी बेंच के बीच
चार बेंचो का फासला है
जब मास्टर ने तुमको डाटा था
इक प्रश्न का ग़लत हल बताने पर
उसको बहुत ही गालिया दी थी मैने
मन ही मन.
और सोचा की सारे के सारे सवाल
तुम्हे पहले से ही समझा दूँ
तुम्हे निहार रहे थे कुछ छात्र
मन किया उन्हेभी धमका दूँ
पढ़ने आते है या बदमाशी करने
पर फिर लगा उनकी क्या ग़लती
तुम सच में
बहुत अच्छे लग रहे थे कल.
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