Sunday, December 4, 2011

तीन पैरो की टेबल


घर शिफ्टिंग के दौरान, सामान पैक करते करते
अनायास ही दिख गयी वो
थोड़ी नाराज़ सी है मुझसे
कई दिनोसे रूठी रूठी जान पड़ती थी
या फिर बीमारी की वजह से
थोड़ी चिड़चडी हो गयी है


दो साल पहले जब नई नई आई थी घर में
काफ़ी घुल मिल गये थे हम दोनो
कितनी ही कविताएँ लिखी मैंने उस पे
और कितने ही चाय के कप 
ग़लती से उसपे गिरा दिए
पर कभी बुरा नही माना उसने


एक दिन उसका एक स्क्रू ढीला होकर
पता नही कहाँ गिर गया
बीमारी दिन ब दिन बढ़ती गई
फिर एक दिन उसका एक पैर घायल हो गया
उस दिन से काम वाली दीदी ने 
उसे एक कोने में रख दिया था फोल्ड करके


आज जब घर का सामान पॅक हो रहा है
शायद चाहती है की उसे भी साथ ले जाऊं
इसीलिए नाराज़ है शायद मेरी,तीन पैरो की टेबल

No comments:

Post a Comment