आगे की जब सोचता हूँ
पीछे सब गुम हो जाता है
क्या छुपा है काल की गर्त में
सब मालूम हो जाता है.
भविष्य को देखकर चलने का
जब कभी जुनून हो जाता है
हर कदम घावों पर रखना
इक क़ानून हो जाता है.
जिंदा जो में इस शरीर को
किसी तरह रख लेता हूँ
अंजाने मेरे हाथो इस
मन का खून हो जाता है.
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