ज़मानो से हूँ होशदार
नही बर्दास्त होता अब,
मुझे होश की दवा नही
बेहोशी का हकीम दिला दो
की मुझको प्यार ना ज़्यादा
ना कम है बुतपरस्ती से
जो करदे ख़त्म ये दंगे
य राम, या रहीम दिला दो
नही बर्दास्त होता अब,
मुझे होश की दवा नही
बेहोशी का हकीम दिला दो
की मुझको प्यार ना ज़्यादा
ना कम है बुतपरस्ती से
जो करदे ख़त्म ये दंगे
य राम, या रहीम दिला दो
No comments:
Post a Comment