Sunday, January 8, 2012

कहाँ गए


साज़ यहाँ, आवाज़ यहाँ
पर सुनने वाले कहाँ गए
दिल रह रह कर पूछ रहा
हमें पूछने वाले कहाँ गए

जो याद कभी कर लेते थे
वो भूलनेवाले कहाँ गए
संग संग ख्वाबो के झूलो में
वो झूलनेवाले कहाँ गए

सपनो की साथ वो चादर
झीनी बुननेवाले कहाँ गए
आकाश में अंतिम यादों के
वो उड़नेवाले कहाँ गए

दिल रह रह कर पूछ रहा
हमें पूछने वाले कहाँ गए

1 comment:

  1. this reminds me of a bashir badr couplet - "unhi raahon ne, jin par kabhi tum chale the saath mere;
    mujhe rok rok poocha "tera humsafar kahan hai"...

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